स्मरे नित्यम्Śatapathī, Pāramitā, 1965-सतपथी, पारमिता, 1965-2025 "बार-बार दोहराए जाते रहे और कानों में घुलते रहे पुराणों की महीयसी नारियों के चरित्र मानो मेरे चेतना पटल पर उकेर दिए गए हैं। उनके महनीय जीवन की विडंबनाएँ समाज को बार-बार झकझोरती रही हैं। ये पात्र निश्चित ही शक्तिशाली, धैर्यशील और दक्ष हैं, जबकि कैसे-कैसे दुर्योग, दुर्भाग्य का सामना उन्हें करना पड़...