Bholārāma kā jīva
भोलाराम का जीवParasāī, Hariśaṅkaraपरसाई, हरिशंकर2024
Book
"परसाई के पास एक ऐसी नैतिक दृष्टि है जो गहरे पर्यवेक्षण, अनुभव, अध्ययन और वैचारिकता से बनी है। यह उन्हें साहसी तथा आत्मविश्वासी बनाती है, जो काइयाँ से काँइयाँपन में होड़ लेनेवाली भी है। हम उनके लेखन में बार-बार पाएँगे कि वे कुतर्कियों को यूँ ही बख्श नहीं देते, उनसे प्रतिस्पर्धा करते हैं और खदेड़ते हुए दूर तक उनके पीछे जाते हैं। परसाई श्रेष्ठ व्यंग्यकार इसलिए हैं कि वे केवल व्यंग्यकार ही नहीं हैं। हर स्थिति में व्यंग्य को नहीं बरतते; जब अनिवार्य होता है, तभी उसका उपयोग करते हैं। इसका सम्बन्ध परसाई के संवेदनशील-विचारधारायुक्त प्रगतिशील व्यक्तित्व से है जो उनके व्यंग्य नए रूपों में नैतिक और कलात्मक बनाता है।"--https://www.bookchor.com.
Main title:
Bholārāma kā jīva / Hariśaṅkara Parasāī ; sampādaka, Veda Prakāśa = Bholaram ka jeev : satire / by Harishankar Parsai ; edited by Ved Prakash.भोलाराम का जीव / हरिशंकर परसाई ; संपादक, वेद प्रकाश = Bholaram ka jeev : satire / by Harishankar Parsai ; edited by Ved Prakash.
Author:
Parasāī, Hariśaṅkara, authorपरसाई, हरिशंकर, authorPrakāśa, Veda (Editor), editorप्रकाश, वेद (Editor), editor
Work:
Edition:
Pahalā saṃskaraṇa.पहला संस्करण.
Imprint:
Naī Dillī : Rājakamala Prakāśaṇa, 2024.नई दिल्ली : राजकमल प्रकाशन, 2024.
Collation:
159 pages ; 22 cm
Variant title:
Other title information from half title page: Vyaṅgya
Notes:
Also available as an e-book.In Hindi.
ISBN:
9789360865078 ((hardback))
Dewey class:
891.43871
LC class:
PK2098.P328
Language:
Hindi
Added title:
BRN:
493359