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Kām̐sa : mardavādī zamīdārī qānūna kī balivedī para zibaha hotī dharatī-putriyoṃ kā ārtanāda

काँस : मर्दवादी ज़मीदारी क़ानून की बलिवेदी पर ज़िबह होती धरती-पुत्रियों का आर्तनादMoravāla, Bhagavānadāsa, 1960-मोरवाल, भगवानदास, 1960-2024
Book
""काँस ग्रामीण जीवन के आधुनिक चितेरे भगवानदास मोरवाल का ग्यारहवाँ उपन्यास है। इनके पूर्व के उपन्यासों की तरह यह उपन्यास भी भारतीय समाज की जनपदीय गन्ध और लोक-संस्कृति को अपने आप में समाहित किये हुए है। उत्तर भारत के एक राज्य हरियाणा के सबसे पिछड़े ज़िले मेवात अर्थात स्वतन्त्रता पूर्व के पुराने गुड़गाँव ज़िले के मेव समुदाय के लिए बने, मर्दवादी क़ानून की भोथरी धार से लहूलुहान होती चाँदबी, जैतूनी, जैनब, शाइस्ता, समीना, अरस्तून जैसी अनेक धरती-पुत्रियों का इसमें रह-रहकर चीत्कार सुनाई देगा । यह उपन्यास भारतीय समाज के उन. अन्तर्विरोधों पर गहरी चोट करता है, जो रिवाज़े-आम अर्थात कस्टमरी लॉ जैसे अमानुषिक और बर्बर कानूनों के चलते आधुनिक एवं सभ्य कहे जाने वाले समाज में और गहरे होते जा रहे हैं।"--www.amazon.com.
Edition:
Sajilda prathama saṃskaraṇa.सजिल्द प्रथम संस्करण.
Imprint:
Nayī Dillī : Vāṇī Prakāśana, 2024.नयी दिल्ली : वाणी प्रकाशन, 2024.
Collation:
247 pages : illustrations (black and white) ; 23 cm
Notes:
Novel.Also available as an e-book.In Hindi.
ISBN:
9789357758291 ((hardback))9789357757737 ((paperback))
Dewey class:
891.43371
LC class:
PK2098.29.O73
Language:
Hindi
Added title:
BRN:
493357
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